18 अक्टूबर 2019 - 13:13
तेहरान टू बैतुलमुकद्दस रोड... इस्राईल का भयानक ख्वाब... हक़ीक़त से कितना क़रीब? आतंकवादियों के इलाज के लिए इस्राईल को हर महीने क

इस्लामी गणतंत्र ईरान की सफल नीतियों ने साम्राज्यवादियों को इलाक़े और दुनिया में कई बार पराजित किया है। हालिया दिनों में अमरीका के प्रसिद्ध पत्रकार, थामस फ्रेडमैन ने न्यूयार्क टाइम्ज़ में प्रकाशित अपने एक लेख में लिखा कि " ईरान तेहरान से बैरुत तक एक ज़मीनी पुल बना रहा है ताकि इस्राईल के गले में जो फंदा उसने लगाया है उसे और कस सके।"

  इस्राईल की राजधानी तेलअबीव में मीडिया ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि लगभग दो दिन पहले, ब्लू एंड वाइट पार्टी के प्रमुख, इस्राईली रिज़र्व फोर्स के प्रमुख, इस्राईली सेना प्रमुख और इस्राईली प्रधानमंत्री के मध्य होने वाली बैठक में ईरान की ओर से अचानक हमले का मुक़ाबला करने की राहों पर चर्चा की गयी। इसी के साथ गुरुवार को इस्राईली समाचार पत्र हारित्ज़ के टीककार ने इस्राईली सुरक्षा संस्थाओं में अपने सूत्रों के हवाले से लिखा था कि इस्राईल हमले की ईरानी योजनाओं से डरा हुआ है जो तेहरान ने कई महीने पहले से बना रखी है और उन्हें कभी भी व्यवहारिक बना सकता है।

      इस्राईली समाचार पत्र हारित्ज़ ने लिखा है कि अमरीका इलाक़े से भाग गया है जिससे ईरान का प्रभाव और बढ़ेगा और ईरानियों में आत्मविश्वास भी ज़्यादा हो जाएगा जो इस्राईल के लिए खतर की घंटी है।

     इस्राईली टीवी चैनल-13 पर बिन डेविड ने उत्तरी सीरिया पर तुर्की के हमले पर चर्चा के दौरान अमरीका के सीरिया छोड़ने पर अप्रसन्नता प्रकट करते हुए कहा कि इस्राईल, ईरान और बश्शार असद के सामने अकेला हो गया है और उन्हें हमारे " सदिंग्ध " दोस्त पुतीन का समर्थन मिला हुआ है।

     इस्राईल के टीवी चैनल-12  ने सैन्य मामलों के विशेषर " नीर डीफूरी" का एक लेख प्रसारित किया है जिसमें यह बताया है कि किस तरह से इस्राईल ने " अच्छे पड़ोसी " की तरह सीरिया में सक्रिय हज़ारों आंतकवादियों को चिकित्सा सेवा प्रदान की है और रायुलयौम को अपने सूत्रों से पता चला है कि इस्राईली अस्पतालों में इन आतंकवादियों के इलाज का खर्चा सऊदी अरब और क़तर ने उठाया था। इस्राईल इन आतंकवादियों का इलाज करने के लिए सऊदी अरब और क़तर से 90 लाख डालर प्रतिमाह लेता था।

     नीर डीफूरी ने बताया कि तेहरान व तेलअबीब के मध्य मोर्चा खुला हुआ है देर या जल्दी, दोनों की पक्ष, मुद्दे को सुलझाने के लिए कोई दूसरा रास्ता अपना सकते हैं। दूसरे रास्ते से उनका आशय सैन्य टकराव था।

     इस्राईल की यह हालत है, इसराईली नेता और अधिकारी, ईरान से टकराव का भयानक ख्वाब देख कर नींद से चौंक कर उठ जाते हैं। मध्य पूर्व के मामलों पर नज़र रखने वालों को अच्छी तरह से याद है कि लगभग 4 साल पहले इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा था कि " इस्राईल 25 साल के बाद का समय नहीं देख पाएगा" यह बात कहे हुए चार वर्ष का समय बीत चुका है। अब देखें स्वंय इस्राईली इस बारे में क्या कह रहे हैं?

  1. इस्राईली युद्ध मंत्री एविगोर लेबरमैन ने कहा है कि सब से बड़ी चुनौती, ईरान की ओर से हमें अचानक ही घेर लेने की कोशिश है।
  2. नेतेन्याहू ने भी कहा है कि ईरान ने इस्राईल को घेर लिया है और वह इस्राईल का गला दबाना चाहता है।
  3. यरुश्लम पोस्ट ने भी अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि अरब नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने हालिया दिनों में नेतेन्याहू से भेंट की और उनसे कहा कि ईरान और उसके मित्रों ने, अरब जगत के चार एतिहासिक नगरों, अर्थात बैरूत, दमिश्क, बगदाद और सनआ पर क़ब्ज़ा कर लिया है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के संस्थापक इमाम खुमैनी ने 37 साल पहले  कहा था कि " बैतुल मुक़द्दस ( यरुश्लम) का रास्ता, कर्बला से गुज़रता है।" आज इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चेहलुम के अवसर दसियों लाख ईरानी कर्बला में है। ईरानी कर्बला पहुंच चुके हैं, बैतुलमुक़दस कुछ ही दूर है।